AI से बदलेगी फिल्म निर्माण की दुनिया, लेकिन इंसानी रचनात्मकता का नहीं होगा विकल्प: आनंद पांडे
मुंबई: तेजी से विकसित हो रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक फिल्म निर्माण के क्षेत्र में नए अवसरों के द्वार खोल रही है। हालांकि, सिनेमा की आत्मा हमेशा मानवीय रचनात्मकता ही रहेगी। यह बात एनिमेशन प्रोड्यूसर और क्रिएटिव टेक्नोलॉजिस्ट आनंद पांडे ने मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) के 19वें संस्करण में आयोजित एक विशेष कार्यशाला के दौरान कही।
“एक्सप्लोरिंग सिनेमा इन अ कॉम्पैक्ट फ्यूचर” विषय पर आयोजित सत्र में आनंद पांडे ने फिल्म उद्योग में AI की बढ़ती भूमिका और उसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक AI आधारित वीडियो टूल्स लगातार अधिक सक्षम और उपयोगकर्ता-अनुकूल होते जा रहे हैं, जिससे फिल्म निर्माताओं के लिए कम लागत में नए प्रयोग करना आसान हो रहा है।
आनंद पांडे के अनुसार, तकनीक फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को अधिक तेज, प्रभावी और किफायती बना सकती है, लेकिन यह फिल्म उद्योग से जुड़े पेशेवरों की आवश्यकता को पूरी तरह समाप्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह फिल्म कैमरों से डिजिटल तकनीक की ओर बदलाव ने उद्योग को नई दिशा दी थी, उसी तरह AI भी कार्यप्रणाली में परिवर्तन लाएगा और नए रोजगार तथा कौशल विकास के अवसर पैदा करेगा।
कार्यशाला के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या AI भविष्य में असिस्टेंट डायरेक्टर, लाइन प्रोड्यूसर या प्रोडक्शन मैनेजर जैसी भूमिकाओं की जगह ले सकता है, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि तकनीक और मानव विशेषज्ञता साथ-साथ आगे बढ़ेंगी। AI सहयोगी की भूमिका निभाएगा, प्रतिस्थापन की नहीं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि दर्शक हमेशा उन कहानियों से जुड़ते हैं जिनमें भावनाएं, अनुभव और मानवीय संवेदनाएं होती हैं। यही कारण है कि सिनेमा में रचनात्मक सोच और मानवीय दृष्टिकोण की अहमियत कभी कम नहीं होगी।
सत्र में यह भी बताया गया कि AI लेखकों, कंटेंट क्रिएटर्स और स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं को अपने विचारों को बेहतर तरीके से विकसित करने, दृश्य कल्पनाओं को आकार देने और रचनात्मक अवधारणाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में मदद कर सकता है। साथ ही पोस्ट-प्रोडक्शन कार्यों को अधिक सुगम और समयबद्ध बनाने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
कार्यशाला में मौजूद प्रतिभागियों ने AI टूल्स, भविष्य की संभावनाओं और फिल्म उद्योग में उभरते करियर विकल्पों को लेकर कई सवाल पूछे। चर्चा के अंत में यह निष्कर्ष सामने आया कि AI फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को नई गति दे सकता है, लेकिन सिनेमा के केंद्र में हमेशा इंसानी कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता ही रहेगी।
इसके साथ ही मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2026 की कार्यशाला श्रृंखला का समापन भी हुआ।

