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शराब घोटाला मामला: रामगोपाल अग्रवाल की न्यायिक हिरासत 5 अगस्त तक बढ़ी, कोर्ट पहुंचे पूर्व सीएम भूपेश बघेल
शराब घोटाला मामला: रामगोपाल अग्रवाल की न्यायिक हिरासत 5 अगस्त तक बढ़ी, कोर्ट पहुंचे पूर्व सीएम भूपेश बघेल
रायपुर: छत्तीसगढ़ के चर्चित कथित शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार कांग्रेस नेता और पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को शनिवार को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत 5 अगस्त 2026 तक बढ़ाने का आदेश दिया। इसके बाद उन्हें दोबारा जेल भेज दिया गया।
अदालत परिसर में इस दौरान राजनीतिक गतिविधियां भी तेज रहीं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने समर्थकों और कांग्रेस नेताओं के साथ कोर्ट पहुंचे और रामगोपाल अग्रवाल से मुलाकात की। बाद में मीडिया से बातचीत में उन्होंने जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष के नेताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।
तीन साल बाद एजेंसियों के सामने हुए थे पेश
रामगोपाल अग्रवाल लंबे समय तक जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर रहे। इसके बाद उन्होंने 8 जुलाई 2026 को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के समक्ष आत्मसमर्पण किया। पूछताछ और प्रारंभिक जांच के बाद अदालत से मिली पुलिस रिमांड पूरी होने पर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया था। अब अदालत ने उनकी हिरासत की अवधि बढ़ाकर 5 अगस्त तक कर दी है।
किन बिंदुओं पर चल रही है जांच?
जांच एजेंसियां कथित शराब घोटाले से जुड़े वित्तीय लेन-देन, मनी ट्रेल और अन्य संदिग्ध दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। इसके अलावा मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल जारी है। एजेंसियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस ने लगाए राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। वहीं जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है। मामले में अंतिम निर्णय अदालत द्वारा सुनवाई पूरी होने के बाद ही होगा।
छत्तीसगढ़
CGPSC भर्ती घोटाला: 2021-22 भर्ती विवाद की जांच में बड़ा मोड़, अब 500 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की भी पड़ताल
CGPSC भर्ती घोटाला: 2021-22 भर्ती विवाद की जांच में बड़ा मोड़, अब 500 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की भी पड़ताल
रायपुर : छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा बहुचर्चित मामला अब केवल चयन प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य जांच एजेंसियां अब कथित वित्तीय लेन-देन, मनी लॉन्ड्रिंग और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के इस्तेमाल की भी गहन जांच कर रही हैं। जांच से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर एजेंसियां लगभग 500 करोड़ रुपये तक की संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं। हालांकि इस राशि की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है।
क्या है पूरा मामला?
CGPSC भर्ती विवाद की शुरुआत 2021 और 2022 की राज्य सेवा परीक्षाओं के परिणाम सामने आने के बाद हुई थी। चयन सूची में कई ऐसे अभ्यर्थियों के नाम सामने आए, जिनके संबंध तत्कालीन आयोग के पदाधिकारियों, प्रभावशाली अधिकारियों और राजनीतिक परिवारों से बताए गए। इसके बाद पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठे और अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
मामले ने तूल पकड़ने के बाद शिकायतें जांच एजेंसियों तक पहुंचीं और धीरे-धीरे इसकी जांच का दायरा बढ़ता गया।
अब वित्तीय लेन-देन भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े लोगों के बीच किसी प्रकार का अवैध आर्थिक लेन-देन तो नहीं हुआ। बैंक खातों, कंपनियों के दस्तावेज, संपत्ति रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ ऐसे लेन-देन सामने आए हैं जिनके आधार पर धन शोधन (Money Laundering) की आशंका की भी जांच की जा रही है।
CSR फंड के इस्तेमाल पर भी सवाल
जांच के दौरान करीब 47 लाख रुपये की राशि CSR (Corporate Social Responsibility) मद के माध्यम से खर्च किए जाने का मामला भी सामने आया है। एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि संबंधित राशि वास्तव में निर्धारित उद्देश्य पर खर्च हुई या उसका इस्तेमाल किसी अन्य माध्यम से किया गया।
कई लोगों से पूछताछ, दस्तावेज खंगाले जा रहे
जांच एजेंसियों ने इस मामले में कई व्यक्तियों से पूछताछ की है और बड़ी संख्या में बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल डाटा तथा वित्तीय दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों का मिलान किया जा रहा है और जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष लगातार भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को बड़ा भ्रष्टाचार बता रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष ढंग से चल रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
जांच अभी जारी
जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि 500 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता, CSR फंड और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सभी पहलुओं की जांच अभी जारी है। अंतिम निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएगा।
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