जैसलमेर के रेगिस्तान में फिर लौटे ‘महाबस्टर्ड’, दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को जंगल में छोड़ा गया
जैसलमेर: राजस्थान के जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क से देश के बेहद दुर्लभ ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार, 4 अक्टूबर को सैम क्षेत्र में दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को उनके प्राकृतिक वन्य क्षेत्र में छोड़ा।
इस दौरान राजस्थान के वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सरकार के मुताबिक, यह कदम देश में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण और उनकी संख्या बढ़ाने की दिशा में चल रहे लंबे अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
करीब एक दशक की मेहनत के बाद मिली बड़ी कामयाबी
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपलब्धि को वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और मैदान में लगातार काम कर रहे वन्यजीव विशेषज्ञों की करीब एक दशक की मेहनत का परिणाम बताया।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति भी आभार जताया और कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड समेत दूसरी वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक समुदाय को लगातार मार्गदर्शन और सहयोग मिला है।
इस पूरे प्रयास का उद्देश्य केवल पक्षियों को बचाना ही नहीं, बल्कि उन्हें दोबारा उनके प्राकृतिक पर्यावास में स्थापित करना भी है।
अब कैद में संरक्षण से जंगल में वापसी की ओर कदम
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण कार्यक्रम में अब एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। शुरुआती दौर में संरक्षण-प्रजनन के जरिए एक मजबूत आबादी तैयार करने पर जोर दिया गया। अब इसी आबादी के कुछ पक्षियों को धीरे-धीरे जंगल में छोड़कर उनके प्राकृतिक जीवन की ओर वापस ले जाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
आज छोड़े गए दोनों नर पक्षी इसी योजना का हिस्सा हैं। इन पक्षियों की जंगल में गतिविधियों और उनके अनुकूलन का अध्ययन किया जाएगा। इससे आने वाले समय में अन्य पक्षियों को वन्य क्षेत्र में छोड़ने की रणनीति को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
सैम और रामदेवरा में 97 GIB का संरक्षण
PIB के अनुसार, वर्तमान में सैम और रामदेवरा की संरक्षण-प्रजनन सुविधाओं में कुल 97 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड मौजूद हैं।
इनमें:
- 40 पक्षी जंगली अंडों से पैदा हुए हैं।
- 57 पक्षियों का पालन कैप्टिव ब्रीडिंग यानी संरक्षण-प्रजनन व्यवस्था में हुआ है।
- कुल 97 में से 86 पक्षियों को प्रजनन कार्यक्रम के लिए रखा गया है।
- 11 पक्षियों को जंगल में छोड़ने के लिए चुना गया है।
- इन्हीं 11 में से दो नर पक्षियों को 4 अक्टूबर को डेजर्ट नेशनल पार्क में छोड़ा गया।
संरक्षण-प्रजनन के जरिए भी लगातार सफलता मिल रही है। वर्ष 2025 में 24 और 2026 में 29 जीवित चूजों का जन्म हुआ।
‘जंपस्टार्ट’ प्रयोग से भी मिली सफलता
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की संख्या बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों ने कई नए प्रयोग भी किए हैं। इनमें ‘जंपस्टार्ट’ दृष्टिकोण खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस प्रक्रिया में संरक्षण केंद्रों में रखे गए अंडों को जंगली घोंसलों में रखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ जंगली मादाओं ने इन अंडों को स्वीकार किया और उनसे सफलतापूर्वक चूजे निकले।
इस प्रयोग के तहत राजस्थान में छह और गुजरात में दो चूजों के सफल जन्म की जानकारी सामने आई है।
200 वर्ग किलोमीटर में तैयार हो रहे घास के मैदान
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के लिए केवल प्रजनन कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि उसके प्राकृतिक आवास को बेहतर बनाने पर भी काम किया जा रहा है।
राजस्थान वन विभाग डेजर्ट नेशनल पार्क के भीतर करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में घास के मैदानों को सुरक्षित रखने के लिए बाड़े तैयार कर रहा है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा किए गए लंबे समय के टेलीमेट्री अध्ययनों में इन क्षेत्रों को ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के महत्वपूर्ण प्रजनन आवासों के रूप में चिन्हित किया गया है।
कई संस्थाएं मिलकर चला रही हैं संरक्षण मुहिम
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के लिए चलाया जा रहा बस्टर्ड रिकवरी प्रोग्राम केंद्र के पर्यावरण मंत्रालय, राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान की संयुक्त पहल है।
इस अभियान में संरक्षण-प्रजनन के साथ-साथ:
- प्राकृतिक आवास का संरक्षण
- घास के मैदानों की बहाली
- पक्षियों के सामने मौजूद खतरों को कम करना
- वन्य क्षेत्र में पुनर्स्थापना
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी
जैसे पहलुओं पर काम किया जा रहा है।
कार्यक्रम को International Fund for Houbara Conservation और National CAMPA की ओर से वित्तीय/सहयोग भी मिल रहा है।
क्यों खास है ग्रेट इंडियन बस्टर्ड?
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारत की सबसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों में शामिल है। राजस्थान इसके संरक्षण का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे में संरक्षण-प्रजनन केंद्रों से पक्षियों को दोबारा प्राकृतिक वातावरण में छोड़ना इस प्रजाति की आबादी को भविष्य में बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
4 अक्टूबर को जैसलमेर में दो नर GIB को जंगल में छोड़ा जाना इसी लंबी संरक्षण यात्रा का अगला चरण है। इन पक्षियों से मिलने वाले अनुभव के आधार पर आगे और पक्षियों को वन्य क्षेत्र में छोड़ने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने की उम्मीद है।

