प्रोजेक्ट धड़कन बना मासूम दिलों की नई उम्मीद: 6,224 बच्चों की जांच, तीन बच्चियों का सफल निःशुल्क हृदय ऑपरेशन

नारायणपुर: छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य पहल ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है। इस अभियान के तहत नारायणपुर जिले में अब तक 6,224 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है, जबकि जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित तीन मासूम बच्चियों का रायपुर स्थित श्री सत्य साईं हॉस्पिटल में पूरी तरह निःशुल्क सफल हृदय ऑपरेशन किया गया है।

दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों तक पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाएं

आदिवासी बहुल और दूरस्थ इलाकों में अक्सर संसाधनों और जागरूकता की कमी के कारण बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की समय पर पहचान नहीं हो पाती। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए नारायणपुर जिला प्रशासन ने 23 फरवरी 2026 को ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की शुरुआत की।

यह अभियान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य 1 से 18 वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर गंभीर हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की पहचान करना और उनका समय पर निःशुल्क उपचार सुनिश्चित करना है।

6,224 बच्चों की हुई स्वास्थ्य जांच

प्रोजेक्ट धड़कन के तहत आरबीएसके की टीमों ने जिले के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में व्यापक जांच अभियान चलाया। अब तक 6,224 बच्चों की प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। जांच के दौरान जिन बच्चों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं मिलीं, उन्हें आगे उपचार के लिए चिन्हित किया गया।

तीन मासूम बच्चियों को मिला नया जीवन

जांच के दौरान टीम ने तीन बच्चियों में जन्मजात हृदय रोग की पहचान की।

इनमें शामिल हैं—

  • पारुल दुग्गा (1.5 वर्ष)
  • नायशा (3 वर्ष)
  • अनुष्का मंडावी (5 वर्ष)

तीनों बच्चियों की गंभीर स्थिति को देखते हुए आरबीएसके टीम ने तत्काल उन्हें श्री सत्य साईं हॉस्पिटल, रायपुर रेफर किया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उनका पूरी तरह निःशुल्क सफल हृदय ऑपरेशन किया।

सर्जरी के बाद तीनों बच्चियां स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन की ओर लौट रही हैं। बच्चों के स्वस्थ होने से उनके परिजनों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही है।

अभियान लगातार जारी

जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, प्रोजेक्ट धड़कन के तहत बच्चों की स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच लगातार जारी रहेगी ताकि भविष्य में कोई भी बच्चा केवल इलाज के अभाव में गंभीर बीमारी का शिकार न हो। अधिकारियों का कहना है कि समय पर जांच, सही रेफरल और विशेषज्ञ उपचार के बेहतर समन्वय से यह अभियान लगातार सफल साबित हो रहा है।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि बच्चों में निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं—

  • खेलते समय या सामान्य गतिविधि के दौरान सांस फूलना
  • जल्दी थक जाना
  • उम्र के अनुसार वजन नहीं बढ़ना
  • बार-बार सर्दी, खांसी या अन्य बीमारियां होना

समय पर जांच और उपचार से जन्मजात हृदय रोग का सफल इलाज संभव है।

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