हनुमानगढ़ी नमाज विवाद: बृजभूषण शरण सिंह ने बदला रुख, बोले- मेरी बात से किसी की भावना आहत हुई हो तो क्षमा चाहता हूं
अयोध्या/गोंडा: अयोध्या की प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी को लेकर दिए गए बयान पर मचे विवाद के बीच पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने अपने पुराने बयान पर सफाई देते हुए कहा है कि यदि उनकी बात से किसी की धार्मिक भावना आहत हुई है तो वह इसके लिए क्षमा चाहते हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनके पहले दिए गए बयान में पूरी बात स्पष्ट नहीं हो पाई, जिससे विवाद खड़ा हो गया।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान आरोप लगाया था कि वर्ष 2003 में तत्कालीन सपा सरकार के समय हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी और इसे उन्होंने तुष्टिकरण की राजनीति का उदाहरण बताया था। इस बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।
इसी बीच 17 जुलाई को मीडिया से बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा था कि हनुमानगढ़ी में कभी नमाज नहीं पढ़ी गई। उन्होंने यह भी दावा किया था कि मंदिर के निर्माण में एक मुस्लिम शासक का सहयोग रहा था और इसका उल्लेख वहां के ऐतिहासिक संदर्भों में मिलता है। उनके इस बयान के बाद अलग-अलग पक्षों से प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
अब क्या बोले बृजभूषण?
विवाद बढ़ने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उनसे सवाल हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज को लेकर पूछा गया था, जिसका उन्होंने जवाब दिया था। उनका कहना है कि उन्हें उसी समय यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए था कि उनका जवाब केवल सीढ़ियों तक सीमित था। उन्होंने कहा कि “मेरी बात अधूरी रह गई, जिससे भ्रम पैदा हुआ। अगर मेरे बयान से किसी को ठेस पहुंची है तो मैं क्षमा मांगता हूं।”
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का विरोध करना उनकी मंशा नहीं थी और न ही वह किसी धार्मिक विवाद को बढ़ाना चाहते थे। उनके अनुसार, अयोध्या, रामजन्मभूमि और संत समाज के प्रति उनका हमेशा सम्मान रहा है।
इतिहास को लेकर भी जारी है बहस
हनुमानगढ़ी से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर अलग-अलग पक्षों की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं। कुछ संत संगठनों ने बृजभूषण के शुरुआती बयान पर सवाल उठाए हैं और अपने दावों के समर्थन में ऐतिहासिक दस्तावेज होने की बात कही है। ऐसे में यह विवाद केवल राजनीतिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक संदर्भों को लेकर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
फिलहाल क्या स्थिति है?
बृजभूषण शरण सिंह के माफी वाले बयान के बाद विवाद की तीव्रता कुछ कम होती दिखाई दे रही है। हालांकि राजनीतिक दल और विभिन्न संगठन अब भी इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। फिलहाल किसी नए प्रशासनिक या कानूनी कदम की जानकारी सामने नहीं आई है।

