छत्तीसगढ़ में ₹17.24 करोड़ का सर्पदंश मुआवजा घोटाला! मौत का कारण बदलकर निकाले गए सरकारी लाखों रुपये
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सामने आए कथित सर्पदंश (सांप काटने से मौत) मुआवजा घोटाले की जांच में लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस की जांच के अनुसार, वर्षों से सक्रिय एक संगठित गिरोह ने कई मामलों में वास्तविक मौत का कारण बदलकर उसे सांप के काटने से हुई मौत दर्शाया और सरकारी मुआवजा हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए। प्रारंभिक जांच में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े मामलों की अनुमानित राशि करीब ₹17.24 करोड़ बताई जा रही है।
ऐसे काम करता था पूरा नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह में डॉक्टर, राजस्व विभाग के कर्मचारी, वकील, बैंककर्मी और अन्य बिचौलिए शामिल थे। आरोप है कि आत्महत्या, हार्ट अटैक या अन्य कारणों से हुई मौतों को रिकॉर्ड में सर्पदंश से हुई मौत बताया गया। इसके लिए कथित रूप से फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाणपत्र और राजस्व दस्तावेज तैयार किए जाते थे, ताकि मृतक के परिजनों के नाम पर मिलने वाली सरकारी सहायता स्वीकृत कराई जा सके।
16 एफआईआर, कई गिरफ्तारियां
पुलिस ने अब तक इस मामले में 16 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। जांच के दौरान एक डॉक्टर, राजस्व विभाग के कर्मचारियों, वकीलों, बैंक कर्मचारी और अन्य आरोपियों सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कुछ आरोपियों की भूमिका की जांच अभी भी जारी है और फरार लोगों की तलाश की जा रही है।
एक मामला जिसने जांच को नई दिशा दी
जांच में ऐसा मामला भी सामने आया जिसमें एक व्यक्ति की मौत आत्महत्या से हुई थी, लेकिन बाद में उसी केस के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर उसे सांप के काटने से हुई मौत बताया गया। इसी तरह अन्य मामलों में भी दस्तावेजों में बदलाव कर सरकारी मुआवजा लेने का प्रयास किए जाने के आरोप हैं। पुलिस अब प्रत्येक संदिग्ध दावे की अलग-अलग जांच कर रही है।
सरकारी मुआवजा योजना का हुआ दुरुपयोग
छत्तीसगढ़ में सर्पदंश से मृत्यु होने पर निर्धारित नियमों के तहत मृतक के परिजनों को ₹4 लाख की आर्थिक सहायता दी जाती है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी योजना का दुरुपयोग कर फर्जी दावों के माध्यम से सरकारी धन निकालने की साजिश रची गई।
जांच अभी जारी
बिलासपुर पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं हो सकता। जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि किन-किन मामलों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा स्वीकृत कराया गया। जरूरत पड़ने पर और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

