बस्तर में पर्यटन की नई उड़ान: अब एक ही दिन में देख सकेंगे सूर्योदय और सूर्यास्त के दो अद्भुत नज़ारे
कोंडागांव/बस्तर: बस्तर संभाग में पर्यटन को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी पहल आकार ले रही है। कोंडागांव वनमंडल द्वारा विकसित किए जा रहे “सनराइज टू सनसेट” पर्यटन सर्किट के जरिए पर्यटकों को एक ही दिन में बस्तर की प्राकृतिक खूबसूरती, धार्मिक धरोहर और रोमांचक गतिविधियों का अनूठा अनुभव मिलेगा।
इस प्रस्तावित सर्किट की खास बात यह है कि पर्यटक सुबह टाटामारी की पहाड़ियों पर सूर्योदय का मनमोहक दृश्य देख सकेंगे और दिनभर विभिन्न दर्शनीय स्थलों का भ्रमण करने के बाद शाम को पुसपाल में सूर्यास्त की सुनहरी छटा का आनंद ले पाएंगे।
पर्यटन सर्किट के विकसित होने से केशकाल से चित्रकोट तक की यात्रा पहले की तुलना में अधिक आकर्षक और सुविधाजनक हो जाएगी। यात्रा के दौरान चौत्यगृह, भोंगापाल और गोबरहीन जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को भी पर्यटन मानचित्र से जोड़ा जा रहा है। गोबरहीन स्थित प्राचीन शिवलिंग क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र माना जाता है।
एक समय नक्सल प्रभावित माने जाने वाले इन इलाकों में अब विकास और पर्यटन की नई संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों से क्षेत्र में शांति का माहौल बना है, जिसका लाभ पर्यटन क्षेत्र को भी मिलने लगा है।
इस परियोजना से स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। होमस्टे, पर्यटन गाइड, स्थानीय परिवहन, हस्तशिल्प और खानपान जैसी गतिविधियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां कॉटेज, राफ्टिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स जैसी सुविधाओं के विकास की भी योजना बनाई गई है। इससे बस्तर रोमांचक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर सकता है।
जानकारी के अनुसार परियोजना का बड़ा हिस्सा कोंडागांव और नारायणपुर सीमा क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। प्रारंभिक योजना और बजट तैयार कर लिए गए हैं तथा जमीनी स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाएं शुरू हो चुकी हैं।
परियोजना पूरी होने के बाद यह पर्यटन सर्किट बस्तर की नई पहचान बन सकता है, जो प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय विकास को एक साथ जोड़ने का काम करेगा।

