अबूझमाड़ के नक्सल प्रभावित गांवों में ‘सुशासन एक्सप्रेस’ बनी बदलाव की मिसाल
नारायणपुर: छत्तीसगढ़ के दुर्गम और नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र में प्रशासन की पहल से विकास की नई तस्वीर उभर रही है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित ‘सुशासन एक्सप्रेस’ अभियान के माध्यम से सरकारी योजनाओं और सेवाओं को सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाया जा रहा है। इस पहल ने उन इलाकों में रहने वाले आदिवासी परिवारों के लिए राहत का रास्ता खोला है, जहां कभी सरकारी सेवाओं तक पहुंचना बड़ी चुनौती माना जाता था।
अभियान के तहत अब तक 28,273 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 18,908 मामलों का त्वरित निराकरण किया जा चुका है। प्रशासन का दावा है कि इससे न केवल लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, बल्कि शासन और ग्रामीणों के बीच भरोसा भी मजबूत हुआ है।
गांव-गांव पहुंच रहा प्रशासन
सुशासन एक्सप्रेस के जरिए प्रशासनिक टीमें अब उन गांवों तक पहुंच रही हैं, जहां पहुंचना कभी बेहद कठिन माना जाता था। पांगुड़, घमंडी, रेकावाया, ओरछा, गोमे, कच्चापाल, जाटलूर, गारपा, कस्तूरमेटा, रायनार, कोहकामेटा और कोंगे जैसे सुदूर क्षेत्रों में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों का सबसे अधिक लाभ महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को मिल रहा है, जिन्हें पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी जिला मुख्यालय का रुख करना पड़ता था।
आधार और आयुष्मान कार्ड के लिए सबसे ज्यादा आवेदन
शिविरों में सबसे अधिक मांग पहचान और डिजिटल सेवाओं को लेकर देखी गई। आधार अपडेट और एमबीयू सेवाओं के लिए 10,682 आवेदन प्राप्त हुए। वहीं 4,081 आयुष्मान कार्ड और 2,729 नए आधार कार्ड से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की गई।
स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए 1,704 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार भी किया गया। इसके अलावा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों से जुड़े सैकड़ों मामलों का भी समाधान किया गया।
बैंक खाते, राशन कार्ड और पेंशन योजनाओं का लाभ
ग्रामीणों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए 846 नए बैंक खाते खोले गए। इसके अलावा राशन कार्ड, श्रम कार्ड और मनरेगा जॉब कार्ड से जुड़े सैकड़ों आवेदनों का निराकरण किया गया। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत 249 पात्र हितग्राहियों को पेंशन योजनाओं से भी जोड़ा गया।
समय और खर्च दोनों की बचत
जिला प्रशासन का कहना है कि अभियान का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाना है। अब ग्रामीणों को पहचान पत्र, पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं या अन्य योजनाओं के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही है। इससे उनके समय और आर्थिक संसाधनों दोनों की बचत हो रही है।
अबूझमाड़ जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सुशासन एक्सप्रेस केवल एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि विकास और विश्वास के बीच मजबूत सेतु बनकर उभरी है। ग्रामीणों के लिए यह पहल सरकारी योजनाओं को उनके दरवाजे तक पहुंचाने वाली नई जीवनरेखा साबित हो रही है।

