असम से भूटान पहुंची ‘पूरबी’ आइसक्रीम की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप, पूर्वोत्तर के डेयरी उत्पादों को मिला वैश्विक बाजार का रास्ता

गुवाहाटी/नई दिल्ली: असम के डेयरी उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। राज्य में तैयार की जाने वाली ‘पूरबी’ आइसक्रीम की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप सफलतापूर्वक भूटान के लिए रवाना की गई है। इस कदम को पूर्वोत्तर भारत से मूल्य-वर्धित डेयरी उत्पादों के निर्यात की दिशा में एक नई शुरुआत माना जा रहा है।

करीब 5,627 लीटर पूरबी आइसक्रीम की इस पहली खेप को 28 जुलाई को असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह खेप भूटान के प्रमुख शहरों थिम्पू, पारो, फुएंत्शोलिंग और वांगड्यू के बाजारों तक पहुंचेगी, जहां खुदरा ग्राहकों के साथ-साथ संस्थागत खरीदारों को भी इसकी आपूर्ति की जाएगी।

स्थानीय किसानों के दूध से तैयार होती है पूरबी आइसक्रीम

पूरबी ब्रांड की आइसक्रीम का उत्पादन वेस्ट असम मिल्क प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड (WAMUL) द्वारा किया जाता है, जबकि इसकी मार्केटिंग नॉर्थ ईस्ट डेयरी एंड फूड्स लिमिटेड (NEDFL) करती है। इस उत्पाद के निर्माण में असम के हजारों डेयरी किसानों से खरीदे गए दूध का उपयोग किया जाता है।

पहली खेप में कप, कोन, फैमिली पैक और गैलन पैक सहित विभिन्न प्रकार के उत्पाद शामिल किए गए हैं, ताकि भूटान के अलग-अलग उपभोक्ता वर्गों की मांग पूरी की जा सके।

एपीडा ने निभाई अहम भूमिका

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने इस निर्यात को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एपीडा ने निर्यात दस्तावेजों, गुणवत्ता मानकों, नियामकीय प्रक्रियाओं और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने में आवश्यक सहयोग प्रदान किया।

पूर्वोत्तर के निर्यात को मिलेगा नया विस्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि भूटान की भौगोलिक निकटता असम के डेयरी उत्पादों के लिए एक स्वाभाविक और अनुकूल बाजार उपलब्ध कराती है। इससे भविष्य में पूर्वोत्तर भारत से अन्य डेयरी उत्पादों और प्रसंस्कृत खाद्य सामग्री के निर्यात की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

एनईडीएफएल ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में पूरबी ब्रांड के अन्य डेयरी उत्पादों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारने की योजना है। मांग के अनुरूप निर्यात की मात्रा भी चरणबद्ध तरीके से बढ़ाई जाएगी।

किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

इस पहल से असम के सहकारी दुग्ध नेटवर्क से जुड़े हजारों डेयरी किसानों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। निर्यात बढ़ने से स्थानीय डेयरी उद्योग को मजबूती मिलेगी, किसानों की आय में वृद्धि होगी और पूर्वोत्तर भारत के कृषि एवं खाद्य उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलने का रास्ता भी खुलेगा।

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