राज्यसभा से पास हुआ ‘वंदे मातरम्’ विधेयक, अब राष्ट्रीय गीत को मिलेगा कानून का संरक्षण
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा ने ‘प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (संशोधन) विधेयक, 2026’ को पारित कर दिया। इस संशोधन का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को वही वैधानिक संरक्षण देना है, जो अब तक राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राप्त है।
क्या है इस विधेयक का उद्देश्य?
सरकार का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक रहा है और करोड़ों देशवासियों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इसके सम्मान की रक्षा के लिए कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं। संशोधन के बाद यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय गीत का जानबूझकर अपमान करता है या सार्वजनिक रूप से इसके गायन में बाधा पहुंचाता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
सरकार ने क्या कहा?
विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि यह कानून किसी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार ने तर्क दिया कि जिस प्रकार राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज को कानूनी सुरक्षा प्राप्त है, उसी तरह राष्ट्रीय गीत को भी समान संरक्षण मिलना चाहिए।
विपक्ष ने क्या आपत्ति जताई?
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के कुछ सदस्यों ने इसकी आवश्यकता पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि ‘वंदे मातरम्’ पहले से ही देश के लोगों के सम्मान और आस्था का विषय है तथा इसके लिए अलग कानूनी प्रावधान की आवश्यकता पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि कानून बनाते समय नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
अब आगे क्या होगा?
राज्यसभा से पारित होने के बाद विधेयक की आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने के बाद यह संशोधन कानून का रूप ले सकेगा। इसके लागू होने पर ‘वंदे मातरम्’ को कानूनी संरक्षण प्राप्त राष्ट्रीय प्रतीकों की श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
क्या होगा प्रभाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के सम्मान को संस्थागत रूप से मजबूत करना है। हालांकि इसके लागू होने के बाद कानून की व्याख्या और व्यवहारिक उपयोग को लेकर न्यायालयों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।

