शहीद चंद्रशेखर आजाद जयंती 2026: जिसने अंग्रेजों से कहा था— ‘आज़ाद हूं, आज़ाद ही रहूंगा’
23 जुलाई को भारत महान क्रांतिकारी शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती मनाता है। उनका जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति का ऐसा अध्याय है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। आज भी उनका नाम युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।
कम उम्र में लिया देश की आजादी का संकल्प
चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के भावरा गांव में हुआ था। बचपन से ही उनमें देशभक्ति की भावना थी। महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में भाग लेने के दौरान जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, तब अदालत में उन्होंने अपना नाम “आज़ाद”, पिता का नाम “स्वतंत्रता” और पता “जेल” बताया। तभी से वे पूरे देश में चंद्रशेखर आजाद के नाम से प्रसिद्ध हो गए।
क्रांतिकारी आंदोलन की मजबूत कड़ी बने
आजाद ने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के माध्यम से भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और अन्य क्रांतिकारियों के साथ मिलकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया। उनका उद्देश्य केवल अंग्रेजों का विरोध करना नहीं था, बल्कि एक स्वतंत्र और स्वाभिमानी भारत का निर्माण करना था।
‘दुश्मन की गोली का हम सामना करेंगे…’
चंद्रशेखर आजाद का सबसे प्रसिद्ध संकल्प था—
“दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आज़ाद ही रहे हैं, आज़ाद ही रहेंगे।”
27 फरवरी 1931 को प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क (अब चंद्रशेखर आजाद पार्क) में अंग्रेजों ने उन्हें घेर लिया। काफी देर तक अकेले मुकाबला करने के बाद, जब अंतिम गोली बची, तो उन्होंने अंग्रेजों के हाथों गिरफ्तार होने के बजाय स्वयं को गोली मार ली और अपने संकल्प को निभाया।
आज भी क्यों याद किए जाते हैं आजाद?
चंद्रशेखर आजाद केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं हैं। उनका जीवन सिखाता है कि देश के लिए समर्पण, साहस और आत्मसम्मान सबसे बड़ी शक्ति है। आज भी लाखों युवा उनके विचारों और बलिदान से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प लेते हैं।
देशभर में होंगे श्रद्धांजलि कार्यक्रम
चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर देशभर में श्रद्धांजलि सभाएं, पुष्पांजलि कार्यक्रम, विद्यालयों और महाविद्यालयों में विशेष आयोजन तथा उनके जीवन पर व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग उनके विचारों और बलिदान को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
निष्कर्ष
भारत की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले शहीद चंद्रशेखर आजाद का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनका साहस, देशप्रेम और अदम्य आत्मबल भारतीय इतिहास में सदैव अमर रहेगा।

