364 दिन बंद रहता है ये मंदिर, आज सिर्फ 24 घंटे के लिए खुले पट; नाग पंचमी पर उमड़ी भीड़, जानिए क्या है रहस्य
उज्जैन: सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी का संयोग इस बार धार्मिक नगरी उज्जैन के लिए बेहद खास बन गया है। महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट आज श्रद्धालुओं के लिए खोले गए हैं। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसके कपाट साल में केवल एक बार नाग पंचमी के दिन खोले जाते हैं और श्रद्धालुओं को करीब 24 घंटे ही दर्शन का अवसर मिलता है।
नाग पंचमी के मौके पर मंदिर के कपाट खुलने से पहले ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचने लगे थे। इस बार नाग पंचमी का पर्व सोमवार को पड़ने से बाबा महाकाल की नगरी में धार्मिक उत्साह और बढ़ गया है।
नागचंद्रेश्वर मंदिर की सबसे अनोखी बात क्या है?
महाकाल मंदिर परिसर में स्थित इस मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती की एक दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा में दोनों सात फनों वाले नाग के आसन पर विराजमान दिखाई देते हैं। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के कारण नाग पंचमी पर यहां दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।
मंदिर के पट वर्षभर बंद रहते हैं। नाग पंचमी की तिथि पर ही इसे श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग इस एक दिन के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।
नागराज तक्षक से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार नागचंद्रेश्वर मंदिर का संबंध नागराज तक्षक से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि तक्षक ने भगवान शिव की आराधना की थी। इसी कारण इस स्थान को नाग उपासना और शिव भक्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है।
हालांकि ये बातें धार्मिक मान्यताएं हैं, ऐतिहासिक तथ्य के रूप में इनका दावा नहीं किया जाना चाहिए।
इस बार क्यों और खास है 17 अगस्त?
साल 2026 में नाग पंचमी 17 अगस्त को है और इसी दिन सावन का तीसरा सोमवार भी पड़ रहा है। यानी श्रद्धालुओं को एक ही दिन शिव आराधना और नाग देवता से जुड़ी पूजा का अवसर मिल रहा है। पंचमी तिथि 17 अगस्त की शाम तक रहने की जानकारी भी प्रकाशित पंचांग रिपोर्टों में दी गई है।
इसी संयोग के कारण उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर में इस बार श्रद्धालुओं की रुचि और ज्यादा देखी जा रही है।
रात 12 बजे हुआ पहला पूजन
रिपोर्टों के अनुसार नाग पंचमी के अवसर पर मंदिर के पट खुलने के बाद रात 12 बजे प्रथम पूजन की परंपरा निभाई गई। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था शुरू हुई। इस विशेष अवसर पर मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन की तैयारियां भी की गईं।
सिर्फ मंदिर नहीं, अपने आप में एक सालाना धार्मिक परंपरा
नागचंद्रेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता उसका साल में केवल एक दिन खुलना है। यही बात इसे भारत के अन्य शिव मंदिरों से अलग पहचान देती है। नाग पंचमी के दिन यहां दर्शन करने के लिए भक्त पूरे साल इंतजार करते हैं।
आज जब सावन सोमवार भी है, तब इस मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपरा और भी चर्चा में है।

