रायगढ़ क्षेत्रीय एफएसएल में शुरू हुई वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया, गांजा परीक्षण के लिए पहुंचा पहला जब्त मादक पदार्थ
रायगढ़: अपराध अनुसंधान को वैज्ञानिक आधार देने की दिशा में रायगढ़ जिले को बड़ी सौगात मिली है। रायगढ़ में स्थापित क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) में वैज्ञानिक परीक्षण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी क्रम में थाना लैलूंगा द्वारा एनडीपीएस एक्ट के एक प्रकरण में जब्त गांजा परीक्षण के लिए क्षेत्रीय एफएसएल रायगढ़ में जमा कराया गया, जो इस प्रयोगशाला में जांच हेतु पहुंचने वाला पहला मादक पदार्थ बना है।
जानकारी के अनुसार, थाना प्रभारी लैलूंगा उप निरीक्षक गिरधारी साव ने अपने स्टाफ के साथ जब्त गांजा को विधिवत परीक्षण के लिए क्षेत्रीय एफएसएल में जमा कराया। इसके साथ ही प्रयोगशाला में नारकोटिक्स से जुड़े मामलों की वैज्ञानिक जांच का औपचारिक शुभारंभ भी हो गया है।
गौरतलब है कि 17 मई 2026 को सुशासन तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायगढ़ के राजमहल परिसर के समीप स्थापित क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला का लोकार्पण किया था। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह प्रयोगशाला रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की पुलिस के लिए महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करेगी।
अब इन तीनों जिलों में जब्त किए गए मादक पदार्थ, व्हीसरा, ब्लड सैंपल, केमिकल और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच के लिए बिलासपुर नहीं भेजना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर जांच सुविधा उपलब्ध होने से रिपोर्ट जल्द प्राप्त होगी, जिससे अपराधों की विवेचना में तेजी आएगी और लंबित मामलों के निराकरण में भी मदद मिलेगी।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि वर्तमान आपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। ऐसे में क्षेत्रीय एफएसएल की स्थापना से जांच प्रक्रिया अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। समय पर वैज्ञानिक रिपोर्ट मिलने से न्यायिक प्रक्रिया को भी गति मिलेगी और पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने में सहायता मिलेगी।
क्षेत्रीय एफएसएल के संचालन से न केवल पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि अपराधों के वैज्ञानिक विश्लेषण और साक्ष्यों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिलेगा। इसे क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और आधुनिक पुलिसिंग व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

