बीजापुर का पीडिया गांव बदल रहा अपनी तस्वीर: 21 साल बाद फिर गूंजी स्कूल की घंटी, विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा इलाका
रायपुर/बीजापुर : कभी नक्सली गतिविधियों के कारण देशभर में चर्चा में रहने वाला बीजापुर जिले का पीडिया गांव अब बदलाव और विकास की नई मिसाल बनता दिखाई दे रहा है। वर्षों तक भय और असुरक्षा के माहौल में रहने वाला यह गांव अब शिक्षा, पहचान और सरकारी योजनाओं से जुड़कर मुख्यधारा की ओर तेजी से बढ़ रहा है। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि 21 वर्षों से बंद पड़ा स्कूल दोबारा शुरू हो गया है, जहां अब दर्जनों बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं।
21 साल बाद फिर खुला स्कूल
नक्सली हिंसा के कारण गांव का स्कूल वर्ष 2005 के आसपास बंद हो गया था। अब क्षेत्र में सुरक्षा और प्रशासनिक पहुंच बेहतर होने के बाद विद्यालय फिर से संचालित किया गया है। वर्तमान में 84 छात्र-छात्राएं नियमित रूप से स्कूल पहुंच रहे हैं। लंबे अंतराल के बाद स्कूल की घंटी बजने से ग्रामीणों में नई उम्मीद जगी है और बच्चों को अपने ही गांव में शिक्षा का अवसर मिल रहा है।
पहली बार लगा आधार नामांकन शिविर
पीडिया जैसे दूरस्थ और नेटवर्क की सीमित सुविधा वाले गांव में पहली बार विशेष आधार नामांकन एवं आधार अपडेट शिविर आयोजित किया गया। जिला प्रशासन की पहल पर आयोजित इस शिविर में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
तकनीकी चुनौतियों के बावजूद शिविर में 80 ग्रामीणों का आधार पंजीयन और आधार अद्यतन सफलतापूर्वक किया गया। आधार बनने से अब ग्रामीणों के लिए राशन, आयुष्मान भारत, पेंशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेना पहले की तुलना में आसान होगा।
सड़क और प्रशासनिक पहुंच से बदली तस्वीर
गांव तक पहुंचने वाले कच्चे मार्गों के निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बाद अब प्रशासन की पहुंच भी आसान हुई है। यही वजह है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अब सीधे गांव तक पहुंचने लगा है और विभिन्न विभागों की गतिविधियां भी तेज हुई हैं।
ग्रामीणों में बढ़ा भरोसा
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले नक्सली प्रभाव के कारण सामान्य जीवन भी चुनौतीपूर्ण था। सरकारी सुविधाओं तक पहुंचना कठिन था और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती थी। अब हालात बदल रहे हैं। गांव में शांति का माहौल बनने से लोगों का प्रशासन पर विश्वास बढ़ा है और विकास कार्यों को भी गति मिली है।
विकास की नई पहचान बन रहा पीडिया
प्रशासन का मानना है कि पीडिया में शिक्षा और पहचान से जुड़ी पहलें केवल सरकारी योजनाओं का विस्तार नहीं हैं, बल्कि यह उन क्षेत्रों में विश्वास बहाली का भी प्रतीक हैं, जो लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे। स्कूल का दोबारा खुलना और आधार शिविर का सफल आयोजन गांव के बदलते स्वरूप की महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है।

